भोपाल, 21 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश की सियासत में आज का दिन ऐतिहासिक और बेहद सरगर्मियों से भरा रहा। राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक-2026 को सदन के पटल पर रखा, जिसे विपक्ष के कड़े विरोध और भारी हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश अब देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपने यहाँ समान नागरिक संहिता को मंजूरी दी है।
सदन में विपक्ष का भारी हंगामा और विरोध
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जैसे ही सदन में यूसीसी विधेयक चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया गया, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया।
- विपक्ष की मांग: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस बिल को जल्दबाज़ी में लाया गया कदम बताते हुए इसे विस्तृत समीक्षा के लिए 'प्रवर समिति' (Select Committee) के पास भेजने की मांग की।
- कार्रवाई स्थगित: सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और बढ़ते हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित भी करनी पड़ी।
- तुष्टीकरण का आरोप: विपक्ष पर बरसते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि "अब एमपी में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं चलेगा"। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और एक महत्वपूर्ण सुधार का विरोध करने का आरोप लगाया।
मध्य प्रदेश UCC बिल के मुख्य प्रावधान और विशेषताएं
मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, इस कानून का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति के मामलों में समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है। इस विधेयक की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
- एक विवाह अनिवार्य: राज्य में बहु-विवाह (Polygamy) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही वैध शादी मान्य होगी।
- निकाला और हलाला पर रोक: 'निकाह हलाला' जैसी कुप्रथाओं को कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
- लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए एक महीने के भीतर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा, ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। रिश्ता खत्म करने के लिए भी रजिस्ट्रार को सूचित करना होगा।
- विवाह पंजीकरण अनिवार्य: ग्रामीण स्तर से लेकर शहरों तक सभी विवाहों का सरकारी पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
- उत्तराधिकार में समानता: पैतृक और अर्जित संपत्ति के उत्तराधिकार व गोद लेने के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं।
आदिवासी समुदाय को कानून से बाहर रखा गया
मध्य प्रदेश की जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति (ST) यानी आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक पहचान और उनके रूढ़िगत अधिकारों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
आगे क्या होगा?विधानसभा से ध्वनि मत द्वारा पारित होने के बाद अब इस विधेयक को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर और आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही यह कानून पूरे मध्य प्रदेश (आदिवासी क्षेत्रों को छोड़कर) में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे सामाजिक समरसता और आधी आबादी (महिलाओं) के सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति करार दे रहा है।