नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलनकारियों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' संसद भवन परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. सोमवार देर रात (20 जुलाई) शुरू हुआ यह धरना मंगलवार (21 जुलाई 2026) सुबह भी लगातार जारी है. दिल्ली में सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के बावजूद चंद्रशेखर पीछे नहीं हटे और छाता लगाकर बाबा साहेब के चरणों में डटे रहे. उनके इस दृढ़ प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.
लाठीचार्ज से भड़का गुस्सा: चंद्रशेखर ने की 'जलियांवाला बाग' से तुलना
यह पूरा विवाद सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आयोजित 'चलो संसद मार्च' के दौरान हुआ. नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक और परीक्षा प्रणालियों में धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्र-छात्राओं को जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर रोकने का प्रयास किया, तो वहां झड़प और कथित तौर पर लाठीचार्ज की नौबत आ गई.
इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा:
"जुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है, वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है. जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के साथ जो बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया है. मैंने जलियांवाला बाग का दौर नहीं देखा, लेकिन कल के दृश्यों ने निश्चित रूप से इतिहास के उसे काले अध्याय की याद दिला दी."
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की प्रमुख मांगें
संसद परिसर के अंदर से अपनी आवाज बुलंद करते हुए नगीना सांसद ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- पुलिस बर्बरता पर जवाबदेही: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे देश के भविष्य (छात्रों) पर लाठी चलाने वाले पुलिस अधिकारियों पर तुरंत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: देश भर के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कथित पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें.
- लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा: विपक्ष और छात्र संगठनों को अपनी बात रखने की पूरी आजादी दी जाए और दमनकारी नीतियों पर तुरंत रोक लगें।
संसद सत्र के बीच राजनीतिक हलचल तेज
20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन चंद्रशेखर आज़ाद के इस कड़े रुख ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. जहां एक तरफ विपक्षी दलों के कई नेताओं ने चंद्रशेखर के इस कदम का खुला समर्थन किया है और युवाओं पर बल प्रयोग की निंदा की है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने संसद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है. चंद्रशेखर ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक देश के पीड़ित छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष थमेगा नहीं.