ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। ऋषिकेश-भानियावाला राजमार्ग (NH-7) को चार/छह लेन में चौड़ा करने के लिए 3,000 से अधिक (रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 4,369) हरे-भरे पेड़ों को काटने के फरमान ने राज्य में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। हालांकि, बढ़ते जन-आक्रोश और चौतरफा विरोध को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जब तक सभी पक्षों और विशेषज्ञों के बीच पूर्ण आम सहमति नहीं बन जाती, यह काम स्थगित रहेगा।
'चिपको आंदोलन' की यादें हुईं ताजा, मनाया गया 'ब्लैक हरेला'
इस ₹743 करोड़ की हाईवे चौड़ीकरण परियोजना के लिए जैसे ही एनएचएआई (NHAI) ने 'सात मोड़' वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू की, स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों और युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा।
- प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों से लिपटकर (Chipko-style) और रक्षा सूत्र बांधकर आधुनिक कुल्हाड़ियों का रास्ता रोका।
- उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व 'हरेला' (जो हरियाली और वृक्षारोपण का प्रतीक है) के दिन प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर 'ब्लैक हरेला' मनाया और सरकार के इस कदम को प्रकृति पर सीधा प्रहार बताया।
- सोशल मीडिया पर एक स्थानीय महिला का भावुक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने देश के नेतृत्व से इस विनाश को रोकने की मार्मिक अपील की है।
शिवालिक एलिफेंट रिजर्व और वन्यजीवों पर बड़ा खतरा
पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों का तर्क है कि यह पूरा वन क्षेत्र शिवालिक एलिफेंट रिजर्व (Shivalik Elephant Reserve) और राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े बेहद संवेदनशील हाथी गलियारे (Elephant Corridor) के अंतर्गत आता है। यहां से साल (Sal), रोहिणी और कंजू जैसे हजारों प्राचीन व परिपक्व पेड़ों के कटने से:
- हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खंडित हो जाएगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अप्रत्याशित रूप से बढ़ेंगी।
- इस क्षेत्र का लोकल माइक्रो-क्लाइमेट पूरी तरह बिगड़ जाएगा, जिससे गर्मियों में तापमान बढ़ेगा और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
क्या है सरकार और NHAI का पक्ष?
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य के विकास निकायों का कहना है कि देहरादून, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच कनेक्टिविटी को सुधारने और चारधाम यात्रा के दौरान होने वाले भारी ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के अनुसार, इस चौड़ीकरण से यात्रा का समय करीब 20 से 30 मिनट कम हो जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि इसके लिए आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां ली गई थीं और हाथियों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव अंडरपास (Wildlife Underpasses) व पेड़ों के पुनर्रोपण (Transplantation) जैसी शमन योजनाओं को भी ब्लूप्रिंट में शामिल किया गया था।
राजनीतिक मोड़ और वर्तमान स्थिति
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में देहरादून दौरे के दौरान आंदोलनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और इस गंभीर विषय को संसद में उठाने का आश्वासन दिया। यद्यपि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन जनता की भावनाओं, बढ़ते तापमान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस पर अस्थायी रोक लगानी पड़ी। सरकार ने अब प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय जनता, विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के साथ नए सिरे से संवाद करें ताकि कोई वैकल्पिक समाधान (जैसे एलिवेटेड रोड या बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन) खोजा जा सके।