अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और हालिया घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहल पर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक बुलाई गई है। आगामी 23 जुलाई को रामनगरी अयोध्या में साधु-संतों का एक विशाल महाजुटान होने जा रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर के प्रति समाज में फैलाए जा रहे नकारात्मक रवैये और दुष्प्रचार को पूरी तरह से समाप्त करना है।
मणिराम दास छावनी में महामंथन
जानकारी के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल बैठक अयोध्या की प्रसिद्ध मणिराम दास छावनी में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में देश भर के विभिन्न अखाड़ों, पीठों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े 300 से अधिक प्रमुख साधु-संत हिस्सा लेंगे। संघ और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के शीर्ष पदाधिकारियों के भी इस बैठक में मौजूद रहने की संभावना है।
ट्रस्ट की बैठक के तुरंत बाद संतों का जुटान
यह बैठक इसलिए भी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ठीक एक दिन पहले, यानी 22 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने वाली है। राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में मंदिर प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा और हालिया चढ़ावा विवाद जैसी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। ट्रस्ट की इस बैठक के तुरंत बाद, अगले ही दिन 23 जुलाई को संघ संतों के साथ मिलकर आगे की रणनीतिक रूपरेखा तैयार करेगा।
'डैमेज कंट्रोल' और नकारात्मकता मिटाने पर जोर
हाल के दिनों में राम मंदिर और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर कई तरह की नकारात्मक बातें और भ्रांतियां सामने आई हैं। आरएसएस की इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा एजेंडा इसी नैरेटिव (विमर्श) को बदलना है। बैठक के माध्यम से संघ और संत समाज मिलकर देश भर के रामभक्तों और सनातन धर्म प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजने का प्रयास करेंगे, ताकि किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार को पूरी तरह से विफल किया जा सके।
बैठक को लेकर मणिराम दास छावनी पीठ और अयोध्या पुलिस-प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं स्वागत की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।