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हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है "प्रो. रहमान मुसव्विर का जन्मदिवस: शायरी, साहित्य और इंसानियत की खूबसूरत पहचान!

हिंदी-उर्दू अदब की दुनिया में रहमान मुसव्विर एक ऐसे शायर के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं, रिश्तों की जटिलताओं और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। साहित्यिक मंचों और ऑनलाइन संग्रहों में उनकी ग़ज़लों और अशआर को पाठकों तक पहुंच मिली है...; आज प्रो. रहमान मुसव्विर का जन्मदिवस है। इस अवसर पर उनके चाहने वाले, साहित्य प्रेमी और शायर उन्हें दिल से शुभकामनाएँ दे रहे हैं. प्रो.सर ने अपनी शायरी के माध्यम से समाज, इंसानियत, मोहब्बत और जीवन के कई पहलुओं को बहुत ही सरल और असरदार अंदाज़ में पेश किया है।

उनकी शायरी में रोज़मर्रा की जिंदगी, अकेलापन, रिश्तों की गर्माहट और सामाजिक अनुभवों को सरल लेकिन प्रभावी भाषा में पेश किया गया है। उनके कई अशआर पाठकों के बीच लोकप्रिय हुए हैं और साहित्यिक मंचों पर उद्धृत किए जाते हैं..सर रचनाओं में आम लोगों की भावनाएँ और जीवन की सच्चाइयाँ साफ़ दिखाई देती हैं।

यही वजह है कि उनकी शायरी हर वर्ग के लोगों के दिल को छू जाती है. उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपने लेखन और शिक्षण दोनों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस खास मौके पर उनकी कुछ चर्चित पंक्तियाँ "

उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
 

मैं बाहर से उचक कर देखता हूँ
मिरे अंदर तमाशा हो रहा है

कभी बाहर नहीं आती सदा पर्दे में रहती है
ख़ुदा जाने तमन्ना किस के बहकावे में रहती है

तुम्हारा साथ मेरी ज़िंदगी भर की कमाई थी
गए हो जब से तुम ये ज़िंदगी घाटे में रहती


रात कटती है आसमानों पर, दिन को मैं बकरियां चराता हूं।

मेरे कमरे में सिर्फ़ काग़ज़ हैं,
मैं चाराग़ों से ख़ौफ़ खाता हूं।"

मिट्टी के इस बदन में है रूह नर्तकी सी,
साँसों को उस ने मेरी घुंघरू किया हुआ है।

हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी,
लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है।

क्या क्या मुझे किया है इस इश्क़ ने 'मुसव्विर',
जानाँ किया हुआ है जानू किया हुआ है।

प्रो.मुसव्विर का मानना है कि साहित्य समाज को जोड़ने और बेहतर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनकी शायरी लोगों को प्रेम, भाईचारे और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। उनके जन्मदिवस पर साहित्य जगत के अनेक लोगों ने उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना की है। सभी ने उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी।

जन्मदिवस के इस शुभ अवसर पर प्रो. रहमान सर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। उनके शब्दों की रोशनी यूँ ही समाज को नई दिशा देती रहे।

 

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