नई दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2025–26 से देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा दी गई। परिषद के अनुसार, इन संस्थानों में पहले से अध्ययन कर रहे छात्रों की पढ़ाई और डिग्री पूरी करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। नए छात्रों का प्रवेश बंद कर दिया जाएगा, जबकि वर्तमान विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने का अवसर मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक 12-12 कॉलेज उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बंद किए जा रहे हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 8, तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश तथा राजस्थान में 3-3, जबकि गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पुडुचेरी में भी कुछ संस्थानों को बंद किया जाएगा। इनमें अधिकांश निजी कॉलेज हैं, जबकि कुछ सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान भी शामिल हैं।
एआईसीटीई ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि कम होने के कारण कई कॉलेजों में सीटें खाली रह रही थीं। साथ ही, अनेक संस्थानों में योग्य शिक्षकों की कमी, आधुनिक प्रयोगशालाओं का अभाव और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मानकों का पालन नहीं हो रहा था। इन कारणों से ऐसे संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया गया।
पिछले शैक्षणिक सत्र में भी देशभर के 950 से अधिक तकनीकी और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम बंद किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा। एआईसीटीई का उद्देश्य केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें और देश में कुशल इंजीनियरों की संख्या बढ़े।