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GI टैग से Global Brand तक: मलिहाबादी दशहरी आम ने कैसे बढ़ाई उत्तर प्रदेश की वैश्विक पहचान,यहाँ जानें!



लखनऊः उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध मलिहाबादी दशहरी आम अब केवल स्वाद और खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कृषि बाज़ार में अपनी मजबूत पहचान के लिए भी जाना जा रहा है। वर्ष 2026 में जारी विभिन्न कृषि एवं निर्यात रिपोर्टों के अनुसार, GI (Geographical Indication) टैग, आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात प्रोत्साहन नीतियों ने इस पारंपरिक आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई है।  उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद का दशहरी आम अब केवल अपनी मिठास और अनोखी खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी बढ़ती पहचान के लिए भी चर्चा में है। भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद इस पारंपरिक आम की ब्रांड वैल्यू में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह प्रदेश की कृषि निर्यात नीति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरा है। 

मलिहाबादी दशहरी आम को वर्ष 2009 में GI पंजीकरण प्राप्त हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि "मलिहाबादी दशहरी" नाम केवल उत्तर प्रदेश के निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में उगाए गए आमों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मान्यता ने उत्पाद की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और किसानों के हितों को कानूनी संरक्षण प्रदान किया। 

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। वर्ष 2025 में पहली बार मलिहाबाद से लगभग 1,200 किलोग्राम दशहरी आम की सीधी खेप दुबई भेजी गई। इस निर्यात में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे स्थानीय किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। 

2026 में जारी उद्योग विश्लेषणों के अनुसार, भारत का आम बाज़ार निरंतर विस्तार की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती वैश्विक मांग, बेहतर कोल्ड-चेन, प्रोसेसिंग सुविधाओं और कृषि निर्यात में निवेश के कारण GI टैग वाले आमों की मांग में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में बना हुआ है और मलिहाबादी दशहरी इसकी सबसे प्रतिष्ठित किस्मों में शामिल है। 

विशेषज्ञों के अनुसार GI टैग केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक आर्थिक अवसर भी है। इससे उत्पाद की बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है, नकली उत्पादों पर रोक लगती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना मजबूत होती है। मलिहाबादी दशहरी की प्राकृतिक मिठास, कम रेशेदार गूदा और विशिष्ट सुगंध इसे वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच अलग पहचान दिलाते हैं। 

मलिहाबाद उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा आम उत्पादक क्षेत्र माना जाता है, जहां हजारों हेक्टेयर में दशहरी सहित कई प्रसिद्ध किस्मों की खेती होती है। आधुनिक पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात मानकों को अपनाने से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां इस क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद बेहतर तकनीक, सरकारी सहयोग और निर्यात अवसंरचना के विकास से मलिहाबादी दशहरी आम का भविष्य काफी उज्ज्वल माना जा रहा है। 

मलिहाबादी दशहरी आम की यात्रा स्थानीय बागों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक इस बात का प्रमाण है कि पारंपरिक कृषि उत्पाद, यदि गुणवत्ता, ब्रांडिंग और GI संरक्षण के साथ आगे बढ़ें, तो वे वैश्विक पहचान हासिल कर सकते हैं। आज यह आम केवल उत्तर प्रदेश की कृषि विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते कृषि निर्यात और वैश्विक ब्रांड निर्माण की सफलता की कहानी भी बन चुका है। 

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