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अल-नीनो की शैतानी! दुनिया के ठंडे इलाके भी तपने लगे, यूरोप और अमेरिका में भीषण गर्मी का कहर



नई दिल्ली: आमतौर पर ठंडे मौसम के लिए पहचाने जाने वाले यूरोप और अमेरिका इन दिनों रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चपेट में हैं। कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिससे स्वास्थ्य, कृषि और बिजली व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस असामान्य गर्मी के पीछे अल-नीनो (El Niño) एक प्रमुख कारण है। अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी, सूखा और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हीटवेव पहले की तुलना में अधिक तीव्र, लंबे समय तक रहने वाली और अधिक खतरनाक होती जा रही हैं। यही वजह है कि यूरोप और अमेरिका जैसे अपेक्षाकृत ठंडे क्षेत्रों में भी लगातार रिकॉर्ड टूट रहे हैं।

गर्मी की इस लहर के चलते कई देशों ने स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां जारी की हैं। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों, बच्चों तथा बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी नहीं लाई गई, तो भविष्य में ऐसी चरम मौसम घटनाएं और अधिक सामान्य हो सकती हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रभावी कदम उठाना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है.

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