सेशेल्स। भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की एक खास झलक उस समय देखने को मिली, जब राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन स्थित जायंट टॉरटॉइज़ एनक्लोजर का दौरा किया गया। इस दौरान विश्व प्रसिद्ध अल्डाब्रा जायंट टॉरटॉइज़ (विशाल कछुओं) को करीब से देखने और उनके संरक्षण से जुड़े प्रयासों की जानकारी प्राप्त की गई।
अल्डाब्रा जायंट टॉरटॉइज़ केवल सेशेल्स में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले दुर्लभ जीव हैं। इन्हें दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले कछुओं में गिना जाता है। इनकी आयु 150 से 200 वर्ष या उससे भी अधिक हो सकती है। इस कारण ये कई पीढ़ियों और दो शताब्दियों से अधिक के इतिहास के साक्षी रहे हैं। अपनी धीमी गति, विशाल आकार और शांत स्वभाव के कारण ये सेशेल्स की प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं।
इन विशाल कछुओं का भारत और सेशेल्स की मित्रता से भी विशेष संबंध है। वर्ष 2014 में सेशेल्स सरकार ने भारत को सद्भावना के प्रतीक के रूप में दो अल्डाब्रा जायंट टॉरटॉइज़ उपहार स्वरूप दिए थे, जिन्हें कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में रखा गया। इसके कुछ वर्षों बाद सेशेल्स ने कुछ और विशाल कछुए हैदराबाद चिड़ियाघर को भी भेंट किए। यह पहल दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का उदाहरण मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संरक्षण कार्यक्रम न केवल दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि लोगों में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं। राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच विश्वास, सहयोग और साझा प्राकृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश देता है।