नई दिल्ली/यूरोप: यूरोप इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस से लेकर स्विट्जरलैंड तक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। तेज गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, वहीं कई देशों में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है।
हीटवेव का सबसे बड़ा असर स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष अत्यधिक तापमान की वजह से ग्लेशियरों की बर्फ सामान्य से कहीं अधिक तेजी से पिघल सकती है। यदि यही स्थिति बनी रही तो जल संसाधनों, जैव विविधता और पर्यावरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बढ़ती हीटवेव वैश्विक जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है। बढ़ते तापमान के कारण यूरोप के कई हिस्सों में सूखे, जंगलों में आग और जल संकट जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। फिलहाल यूरोप के कई देशों में प्रशासन लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने, पर्याप्त पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की अपील कर रहा है।
यूरोप में हीटवेव से बर्फ पिघलने की गति तेज कर रही है। सोमवार तक स्विट्जरलैंड के 'ग्लेशियर लॉस डे' (ग्लेशियर से बर्फ खत्म होने का दिन) तक पहुंचने की उम्मीद है।'ग्लेशियर लॉस डे' यह वह समय होता है जब पिछली सर्दियों में जमा हुई सारी बर्फ पिघल चुकी होती है। इसके बाद अक्टूबर तक, बर्फ पिघलने का हर दिन ग्लेशियर की बर्फ में कुल नुकसान का कारण बनता है, जिससे ग्लेशियर और सिकुड़ते जाते हैं। स्विट्जरलैंड में ऐसा दूसरी बार होने की आशंका है।