महाराष्ट्र सरकार राज्य में बाल विवाह की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक नई पहल पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्मतिथि छापना अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे विवाह के समय उनकी उम्र की जांच करना आसान हो जाएगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में बताया कि राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था से बाल विवाह रोकने में मदद मिली है। राज्य सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है और संबंधित विभागों के साथ चर्चा के बाद इसे लागू करने की संभावना पर विचार करेगी।
प्रस्तावित नियम के तहत प्रिंटिंग प्रेस, विवाह भवनों और इवेंट आयोजकों को भी जिम्मेदार बनाया जा सकता है। यदि कोई संस्था या व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में बाल विवाह की दर में कमी आई है। वर्ष 2019-21 में यह दर 21.9 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 19.6 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। परभणी में बाल विवाह की दर 48 प्रतिशत, बीड में 43.7 प्रतिशत, धुले में 40.5 प्रतिशत और सोलापुर में 40.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।
अदिति तटकरे ने बताया कि वर्ष 2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके जा चुके हैं और इस संबंध में 136 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में राज्य में बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत से नीचे लाना है।