नई दिल्ली, 25 जून 2026। अल-नीनो के कारण मौसम में आए बदलावों के बीच भारत के सूखा प्रभावित इलाकों में बच्चों और परिवारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। UNICEF के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 41 करोड़ बच्चों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जलवायु संकट का असर पड़ रहा है, जिससे कुपोषण और आजीविका संकट गहराने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सूखे और अनियमित बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में गिरावट आई है। इसका सीधा असर बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर पड़ रहा है।
कुपोषण का बढ़ता खतरा
UNICEF के अनुसार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों में कुपोषण के मामले बढ़ने की संभावना है। खाद्य असुरक्षा के चलते कई परिवार पर्याप्त पौष्टिक आहार उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम पैटर्न से छोटे किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की आय पर असर पड़ रहा है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कम कर रहे हैं। इससे स्कूल छोड़ने की दर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, खासकर बच्चों और महिलाओं में।
आजीविका संकट गहराया
सूखे की स्थिति ने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। किसान फसल खराब होने से कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में पलायन की स्थिति भी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। UNICEF ने सरकारों से बच्चों के पोषण, जल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की अपील की है
अल-नीनो के प्रभाव और बदलते जलवायु पैटर्न के बीच भारत के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों का भविष्य गंभीर खतरे में है। कुपोषण, शिक्षा में गिरावट और आजीविका संकट जैसे मुद्दे आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।