अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौते के बाद संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने बताया कि यह अभियान ईरान, ओमान, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों, अमेरिका और समुद्री उद्योग के सहयोग से चलाया जा रहा है।
डोमिंग्वेज ने कहा कि आवश्यक सुरक्षा गारंटी प्राप्त कर ली गई हैं और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई है।
यह कदम उस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में कई महीनों तक बनी रुकावट के बाद उठाया गया है, जिसे संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने बंद कर दिया था। अब युद्धविराम और समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के नियंत्रण और संचालन को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि किसी भी अंतिम समझौते के तहत ईरान को इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
रुबियो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर किसी भी देश द्वारा शुल्क वसूलना स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ का कहना है कि भविष्य में ऐसी रुकावटों को रोकने के लिए नए प्रबंध किए जाएंगे, लेकिन होर्मुज की स्थिति पहले जैसी नहीं रहेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद नियंत्रण, आवाजाही के अधिकार और संभावित ट्रांजिट शुल्क जैसे मुद्दे आगे भी विवाद के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।