देश में इस समय मौसम का पैटर्न काफी असामान्य हो गया है। एक तरफ मुंबई और पश्चिमी तट पर लगातार भारी बारिश और जलभराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्से सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस असंतुलन के पीछे मुख्य कारण El-Nino (अल-नीनो) प्रभाव है, जो मानसूनी हवाओं और वर्षा वितरण को प्रभावित कर रहा है।
El-Nino एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ता है और भारत में मानसून की गति तथा वितरण बिगड़ जाता है। इसी कारण इस साल बारिश का पैटर्न बेहद अनियमित दिखाई दे रहा है।
मुंबई जैसे तटीय शहरों में लगातार तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है। वहीं, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पर्याप्त बारिश न होने से सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, यह असामान्य पैटर्न जुलाई और अगस्त के महीनों में भी जारी रह सकता है। इससे न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, बल्कि शहरी इलाकों में जल प्रबंधन और आपदा की चुनौतियाँ भी बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे असंतुलन और गंभीर रूप ले सकते हैं।
फिलहाल पूरे देश की नजर मानसून की आगे की चाल पर है, क्योंकि यही तय करेगा कि आने वाले हफ्तों में राहत मिलेगी या मुश्किलें और बढ़ेंगी।